उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गर्मी की शुरुआती दस्तक के साथ ही पानी का संकट गहराने लगा है। जिले के बेरीनाग और आसपास के क्षेत्रों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई इलाकों में चौथे दिन भी नियमित जलापूर्ति नहीं हो सकी है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हैंडपंप और प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, लेकिन वहां भी लंबी कतारें लग रही हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई परिवारों को सुबह से शाम तक सिर्फ पानी के इंतजाम में ही समय बिताना पड़ रहा है।

इस मुद्दे को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और सिर्फ बड़े-बड़े दावों तक सीमित है। लोगों का कहना है कि जब पीने का पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता भी पूरी नहीं हो पा रही है, तो विकास के दावों का क्या मतलब रह जाता है।

क्षेत्र के नागरिकों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

वहीं, प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जल संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, तकनीकी खराबी और जल स्रोतों में कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा।

पिथौरागढ़ में बढ़ता जल संकट न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि राज्य सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी कर पाते हैं, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ आम जनता की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

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