बेतालघाट (नैनीताल)।
16 फरवरी को बेतालघाट में महासम्मेलन, 2027 की बिसात अभी से बिछी
जहां एक ओर राष्ट्रीय दल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अभी रणनीति के शुरुआती दौर में हैं, वहीं नैनीताल विधानसभा क्षेत्र से उभर रहे युवा निर्दलीय नेता शीलू कुमार ने चुनावी मोड में आते हुए क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। आगामी 16 फरवरी को बेतालघाट में आयोजित होने जा रहा उनका महासम्मेलन न केवल शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है, बल्कि इसे 2027 की राजनीतिक दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव भी माना जा रहा है।
शीलू कुमार की यह पहली बड़ी सार्वजनिक सभा होगी, जिसे लेकर क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बेतालघाट सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंच निर्माण, बैठक व्यवस्था, प्रचार सामग्री और जनसंपर्क को लेकर आयोजक पूरी तरह सक्रिय हैं।
ग्रामीणों और युवाओं में बढ़ती पकड़
बीते कुछ महीनों से शीलू कुमार लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। गांव-गांव जाकर युवाओं, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद उनकी राजनीतिक शैली का केंद्र रहा है। स्थानीय मुद्दों—जैसे रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं—पर उनका फोकस उन्हें पारंपरिक राजनीति से अलग पहचान दिला रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार महासम्मेलन में बड़ी संख्या में युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व जनप्रतिनिधि और निर्दलीय राजनीति से जुड़े चेहरे जुट सकते हैं। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि शीलू कुमार केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक राजनीतिक धारा को आकार देने की कोशिश में हैं।
भाजपा-कांग्रेस से इतर विकल्प की तैयारी
शीलू कुमार का स्पष्ट मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता भाजपा और कांग्रेस के अलावा एक मजबूत, ईमानदार और स्थानीय विकल्प की तलाश में होगी। वे बार-बार यह कहते नजर आते हैं कि क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान दिल्ली या देहरादून के राजनीतिक समीकरणों से नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े नेतृत्व से निकल सकता है।
महासम्मेलन के मंच से वे विकास, रोजगार, युवाओं की भागीदारी और पारदर्शी राजनीति को लेकर बड़ा संदेश दे सकते हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह सम्मेलन नैनीताल विधानसभा में निर्दलीय राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है।
क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ती हलचल
बेतालघाट महासम्मेलन ने पहले ही क्षेत्रीय राजनीति में सरगर्मी बढ़ा दी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में इस आयोजन को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि यदि शीलू कुमार का यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में निर्दलीय युवा चेहरे उत्तराखंड की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
अब निगाहें 16 फरवरी पर टिकी हैं, जब बेतालघाट से यह तय होगा कि 2027 की राजनीति में युवा निर्दलीय विकल्प कितना मजबूत होकर उभरता है।
