देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़ी संख्या में लोगों को काम मिला है। प्रदेश में अब तक 6.54 लाख परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है, जबकि औसतन प्रत्येक परिवार को करीब 21 दिनों का काम मिला है।

ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार मनरेगा के तहत राज्य में लगातार विभिन्न विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जिनमें ग्रामीण सड़कों का निर्माण, जल संरक्षण, तालाब और नहरों की मरम्मत, पौधारोपण तथा भूमि सुधार जैसे कार्य प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर विकास को भी गति मिल रही है।

गांवों में बढ़ा रोजगार, पलायन पर भी असर

अधिकारियों का कहना है कि मनरेगा के तहत मिलने वाले रोजगार से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है। खासतौर पर पर्वतीय जिलों में इस योजना का लाभ लोगों को अधिक मिल रहा है। इससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में रोजगार मिलने लगा है, जिससे पलायन को भी कुछ हद तक रोकने में मदद मिल रही है।

महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी

मनरेगा कार्यों में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं निर्माण और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में हिस्सा ले रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है।

कई विकास कार्यों को मिली रफ्तार

राज्य में मनरेगा के तहत जल संरक्षण, चारागाह विकास, खेत सुधार, सिंचाई नहरों की सफाई और ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। इससे एक तरफ ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो रहा है, जो भविष्य में गांवों के विकास में सहायक साबित होंगे।

सरकार का लक्ष्य – हर जरूरतमंद को काम

ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार मनरेगा का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना है। विभाग का कहना है कि आने वाले महीनों में और अधिक परिवारों को इस योजना से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीणों को इसका लाभ मिल सके।

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