पंजाब में खत्म होगी ठेकेदारी व्यवस्था, 65 हजार कर्मचारियों को होगा फायदा; अब अन्य राज्यों में भी उठ सकती है ऐसी मांग

भगवंत मान सरकार का बड़ा फैसला, 10 साल बाद कर्मचारियों को किया जाएगा रेगुलर

चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने सरकारी विभागों में वर्षों से चली आ रही ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में करीब 65 हजार कर्मचारियों को राहत देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार के इस निर्णय के तहत अब कर्मचारियों को ठेकेदारों और बिचौलियों के माध्यम से नहीं, बल्कि सीधे सरकार के अधीन रखा जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आउटसोर्स और ठेका प्रणाली में कार्यरत कर्मचारियों को नई व्यवस्था के तहत सीधे सरकारी ठेक पर लिया जाएगा तथा 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद उन्हें रेगुलर करने का प्रावधान भी किया गया है। इसके लिए पंजाब सरकार ने पुराने आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों से जुड़े कानूनों को समाप्त कर नए विधेयकों को मंजूरी देने का निर्णय लिया है।

कर्मचारियों को मिलेंगी कई सुविधाएं

नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा। इसके साथ ही उन्हें प्रसूति लाभ, कैजुअल छुट्टियां और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी दी जाएंगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना लिखित कारण और सुनवाई का अवसर दिए नौकरी से नहीं हटाया जाएगा।

जोखिम वाले कर्मचारियों को विशेष राहत

सरकार ने जोखिम भरे कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था बनाई है। जिन कर्मचारियों की ड्यूटी जान जोखिम में डालने वाले कार्यों में होती है, उन्हें पांच साल के बजाय तीन साल बाद ही सरकारी ठेक व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इसमें फायर ब्रिगेड कर्मचारी, बिजली विभाग के लाइनमैन, सीवर वर्कर, सफाई कर्मचारी और कूड़ा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।

इन विभागों के कर्मचारियों को होगा लाभ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिजली विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, सहकारी संस्थाएं, स्कूल शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, कृषि, जेल, तकनीकी शिक्षा, पीडब्ल्यूडी और मेडिकल शिक्षा विभाग के हजारों कर्मचारियों को इस फैसले का सीधा लाभ मिलेगा। अकेले बिजली विभाग में 15 हजार से अधिक कर्मचारियों को राहत मिलने की बात कही गई है।

अन्य राज्यों में भी बढ़ सकती है मांग

पंजाब सरकार के इस फैसले के बाद अब देश के अन्य राज्यों में भी ठेका और आउटसोर्स कर्मचारियों के बीच नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से विभिन्न राज्यों में संविदा कर्मचारियों द्वारा नियमितीकरण और नौकरी सुरक्षा की मांग उठाई जाती रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि पंजाब मॉडल को लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों में भी कर्मचारियों के संगठन सरकारों पर दबाव बना सकते हैं।

राजनीतिक और कर्मचारी संगठनों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई कर्मचारी संगठनों ने इसे श्रमिक हित में ऐतिहासिक कदम बताया


दम बताया है।

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