नैनीताल।

 

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चर्चित ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज सात मुकदमों में से पाँच मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।

 

मामले की सुनवाई शीतावकाश काल में न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ज्योति अधिकारी को निर्देश दिए कि उनसे संबंधित जो भी आपत्तिजनक पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली गई हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए, ताकि आगे कोई व्यक्ति आहत न हो। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करते समय भाषा का चयन जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।

 

 

दरअसल, हल्द्वानी निवासी ब्लॉगर ज्योति अधिकारी पर अंकिता भंडारी हत्याकांड के दौरान सोशल मीडिया पोस्ट और धरना-प्रदर्शन के समय देवी-देवताओं व पहाड़ की महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों के प्रयोग का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने हाथ में दराती लेकर विवादित बयान दिए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ।

 

 

इस मामले में ज्योति अधिकारी के खिलाफ हल्द्वानी समेत प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर कुल सात मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से दो मामलों में उन्हें जेल भी जाना पड़ा और वे छह दिन की सजा काट चुकी हैं। शेष पाँच मामलों में गिरफ्तारी की आशंका को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।

 

 

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के उद्देश्य से देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे समाज विशेषकर पहाड़ की महिलाएं आहत हुईं। सरकार ने कहा कि एक ब्लॉगर को इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

 

 

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अधिकांश आपत्तिजनक पोस्ट सोशल मीडिया से हटा दी गई हैं और जो शेष हैं, उन्हें भी हटा दिया जाएगा। साथ ही यह भी दलील दी गई कि दो मामलों में वे पहले ही जेल की सजा भुगत चुकी हैं, इसलिए शेष पाँच मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।

 

 

दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाँच मामलों में ज्योति अधिकारी की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अब सरकार के

जवाब के बाद होगी।

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