देहरादून।
उत्तराखंड की Uttarakhand Power Engineers Association ने ऊर्जा विभाग में शीर्ष पदों के लिए प्रस्तावित तकनीकी पात्रता मानदंडों में बदलाव का कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि तकनीकी पदों पर गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि के अधिकारियों की नियुक्ति का रास्ता खोला गया, तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पावर सेक्टर अत्यंत तकनीकी और संवेदनशील क्षेत्र है, जहां निर्णय लेने वाले अधिकारियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना अनिवार्य है। उनका तर्क है कि पात्रता मानदंडों में बदलाव से वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी इंजीनियरों के प्रमोशन और मनोबल पर असर पड़ेगा।
सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
इंजीनियर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने प्रस्तावित संशोधन को वापस नहीं लिया तो राज्यभर के इंजीनियर सामूहिक इस्तीफे पर विचार कर सकते हैं। संघ का कहना है कि यह केवल पदों का मामला नहीं, बल्कि ऊर्जा तंत्र की गुणवत्ता और पारदर्शिता से जुड़ा विषय है।
सरकार से वार्ता की मांग
एसोसिएशन ने राज्य सरकार से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना तकनीकी विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा किए ऐसे निर्णय लेना ऊर्जा क्षेत्र के हित में नहीं होगा।
ऊर्जा विभाग की प्रतिक्रिया
ऊर्जा विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और कार्यप्रणाली को अधिक लचीला बनाने के उद्देश्य से विचाराधीन हैं। हालांकि, विभाग की ओर से अब तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर बिजली आपूर्ति व्यवस्था और विभागीय कार्यों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और इंजीनियर संघ के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई हैं।
