देहरादून में शनिवार को राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब अंबेडकर महामंच के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में दलित समाज के लोग शामिल हुए और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कार्यकर्ताओं के तेवर तीखे नजर आए।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अंबेडकर महामंच के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी केवल राजनीतिक लाभ के लिए स्वयं को “दलित हितैषी” बताती है, जबकि जमीनी स्तर पर दलित और पिछड़े वर्ग के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति कर कांग्रेस सामाजिक समरसता और शांतिपूर्ण माहौल को प्रभावित कर रही है।

घेराव के दौरान महामंच की ओर से 10 सूत्रीय एजेंडा भी सार्वजनिक किया गया। इसमें कांग्रेस द्वारा की जा रही कथित तुष्टीकरण की राजनीति का विरोध, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की मांग और दलित-पिछड़े वर्ग के मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग प्रमुख रही। इसके अलावा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों के संरक्षण और सम्मान की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस दिशा में राज्य में उठाए गए कदमों का समर्थन किया जाएगा।

विनोद कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए लागू की गई नीतियों का उनका संगठन समर्थन करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस द्वारा निकाली गई मुख्यमंत्री विरोधी यात्रा दलित और पिछड़ा विरोधी मानसिकता को दर्शाती है, जिसका लोकतांत्रिक तरीके से प्रतिवाद किया जाएगा।

महामंच ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और कानूनसम्मत है। साथ ही भविष्य में यदि दलित एवं पिछड़ा वर्ग के हितों के खिलाफ कोई राजनीतिक गतिविधि होती है तो उसका संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।

हांलांकि राजनीतिक हलकों में इस विरोध को आगामी चुनावी माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। देहरादून में हुए इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर पर सबकी नजर र

हेगी।

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