दिल्ली में जुटे लाखों युवा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग तेज,राष्ट्रीय मीडिया पर अनदेखी का आरोप, आंदोलन स्थल पर गूंजे “गोदी मीडिया मुर्दाबाद” के नारे
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर युवाओं के आक्रोश की गवाह बनी। जंतर-मंतर पर आयोजित विशाल युवा प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और युवा संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और युवाओं की समस्याओं की अनदेखी के लिए केंद्र सरकार तथा शिक्षा मंत्रालय जवाबदेह हैं।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने हाथों में तिरंगा, पोस्टर और बैनर लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और युवाओं को न्याय दिलाने की मांग उठाई। जंतर-मंतर का पूरा क्षेत्र घंटों तक नारों से गूंजता रहा। प्रदर्शनकारियों ने “शिक्षा बचाओ”, “युवाओं को न्याय दो” और “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दो” जैसे नारे लगाए।
आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही। प्रदर्शन में शामिल कई युवाओं ने आरोप लगाया कि देश के लाखों छात्रों और युवाओं से जुड़े इस बड़े मुद्दे को राष्ट्रीय मीडिया द्वारा अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया। इसी नाराज़गी के बीच प्रदर्शन स्थल पर “गोदी मीडिया मुर्दाबाद” के नारे भी सुनाई दिए। युवाओं का कहना था कि जब देश का भविष्य माने जाने वाले छात्र अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, तब मीडिया का दायित्व है कि वह उनकी आवाज़ को देश तक पहुंचाए।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का प्रश्न है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली गड़बड़ियों, पेपर लीक की घटनाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी ने युवाओं के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। ऐसे में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने चाहिए।
आंदोलन में शामिल युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कई वक्ताओं ने कहा कि यह केवल दिल्ली का आंदोलन नहीं है, बल्कि देश के गांवों, कस्बों और शहरों में रहने वाले उन लाखों युवाओं की आवाज़ है जो रोजगार, शिक्षा और निष्पक्ष अवसरों की उम्मीद लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस प्रदर्शन की चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं के बीच बढ़ती असंतोष की भावना को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।
जंतर-मंतर से उठी यह आवाज़ अब केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य को लेकर राष्ट्रीय बहस का विषय बनती जा रही है।
