एल नीनो, पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती यूरिया मांग के बीच केंद्र अलर्ट: खरीफ सीजन को लेकर राज्यों को विशेष निर्देश
नई दिल्ली। खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार ने राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए हैं। संभावित एल नीनो प्रभाव, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उर्वरकों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने यूरिया जमाखोरी, कालाबाजारी और आपूर्ति बाधाओं पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है।
केंद्र सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन खरीफ सीजन के दौरान मांग अचानक बढ़ सकती है। इसी को देखते हुए राज्यों को अंतिम स्तर तक समय पर खाद पहुंचाने, वितरण व्यवस्था की निगरानी करने और कृत्रिम संकट पैदा करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2026 के लिए देश में कुल उर्वरक आवश्यकता लगभग 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है। इसके मुकाबले लगभग 200 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक स्टॉक पहले से उपलब्ध बताया गया है, जो कुल जरूरत का 50 प्रतिशत से अधिक है। केंद्र का दावा है कि यह सामान्य वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति है।
उर्वरक विभाग ने बताया है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई गई है। इसके परिणामस्वरूप यूरिया उत्पादन में लगभग 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और दैनिक उत्पादन क्षमता में भी बड़ा इजाफा हुआ है।
सरकार ने संभावित आपूर्ति संकट से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तैयारी तेज कर दी है। भारत ने खरीफ सीजन से पहले लगभग 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए नया वैश्विक टेंडर जारी किया है। इसके अलावा DAP और अन्य उर्वरकों की खरीद प्रक्रिया भी जारी है ताकि किसानों को सीजन के दौरान किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को भी सरकार गंभीरता से देख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो उर्वरक उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से केंद्र सरकार लगातार समीक्षा बैठकें कर रही है और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर भी काम कर रही है।
कृषि मंत्रालय ने राज्यों को कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने और वैकल्पिक खेती योजनाओं पर भी तैयारी रखने को कहा है। एल नीनो की आशंका के चलते कई जिलों के लिए विशेष कंटिजेंसी प्लान तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि देश में बीजों का भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खरीफ फसलों के लिए 185 लाख क्विंटल से अधिक बीज उपलब्ध हैं।
हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि कागजों पर उपलब्ध स्टॉक और जमीन पर किसानों को मिलने वाली खाद में अक्सर बड़ा अंतर दिखाई देता है। कई राज्यों में पिछले वर्षों में यूरिया के लिए लंबी कतारें, कालाबाजारी और कृत्रिम संकट की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में इस बार सरकार के दावों की असली परीक्षा खरीफ सीजन के दौरान होगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की चुनौती, वैश्विक तनाव और उर्वरक मांग का दबाव एक साथ बढ़ा तो खेती की लागत और खाद उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासनिक निगरानी और समय पर वितरण व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
फिलहाल केंद्र सरकार का दावा है कि देश में खाद, बीज और कृषि रसायनों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, लेकिन खरीफ सीजन शुरू होते ही स्थिति पर देशभर की नजर रहने वाली है।
