दलित, ब्राह्मण, ठाकुर और पंजाबी प्रतिनिधित्व के साथ संतुलन बनाने की कोशिश, राजनीतिक संदेश साफ

देहरादून | 20 मार्च 2026

उत्तराखंड की राजनीति में आज बड़ा दिन रहा, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट का विस्तार किया गया। इस विस्तार में पांच विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जिससे सरकार ने न केवल प्रशासनिक मजबूती बल्कि सामाजिक और जातीय संतुलन साधने का भी स्पष्ट संकेत दिया है।

कैबिनेट विस्तार में जिन विधायकों को शामिल किया गया है, उनमें

राजपुर सीट से विधायक खजान दास

रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा

हरिद्वार से वरिष्ठ नेता मदन कौशिक

भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा

रुद्रप्रयाग से विधायक भरत चौधरी

शामिल हैं।

जातीय समीकरण पर फोकस

इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी खासियत इसका सोशल इंजीनियरिंग मॉडल माना जा रहा है। सरकार ने अलग-अलग समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर संतुलन साधने की कोशिश की है:

मंत्री अनुसूचित जाति वर्ग से

ब्राह्मण चेहरा

ठाकुर नेता

पंजाबी समुदाय से प्रतिनिधि

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

राजनीतिक संदेश क्या है?

कैबिनेट विस्तार के जरिए धामी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह हर वर्ग और क्षेत्र को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम कर रही है। खासकर हरिद्वार, देहरादून और कुमाऊं क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देकर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

चुनावी नजरिया भी अहम

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह विस्तार केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा भी है। जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधकर पार्टी अपने वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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