Raghav Chadha ने संसद में एक बेहद गंभीर मुद्दा उठाते हुए बैंकों पर गरीबों से “चुपके वाली वसूली” का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बैंकों ने सिर्फ न्यूनतम बैलेंस न रखने के नाम पर करीब 19,000 करोड़ रुपये वसूल किए हैं।

सदन में क्या बोले राघव चड्ढा?

राघव चड्ढा ने कहा कि:

सरकारी बैंकों ने लगभग 8,000 करोड़ रुपये

जबकि निजी बैंकों ने करीब 11,000 करोड़ रुपये

गरीब और आम खाताधारकों से वसूले हैं।

उन्होंने इस वसूली को “गरीबी पर टैक्स” बताते हुए कहा कि यह पैसा उन लोगों से लिया जा रहा है जो पहले से आर्थिक रूप से कमजोर हैं।

किन लोगों पर पड़ रहा असर?

इस मुद्दे का सीधा असर समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ रहा है:

दिहाड़ी मजदूर

छोटे किसान

बुजुर्ग पेंशनभोगी

गृहिणियाँ

ये लोग छोटी-छोटी बचत बैंक में रखते हैं, लेकिन मिनिमम बैलेंस न होने पर 100 से 600 रुपये तक की पेनल्टी कट जाती है।

छिपे चार्जेस पर उठे सवाल

राघव चड्ढा ने बैंकों के कई चार्जेस पर सवाल उठाए:

न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी

ATM लिमिट से ज्यादा इस्तेमाल

बैंक स्टेटमेंट चार्ज

इनएक्टिव अकाउंट फीस

उन्होंने कहा कि ये सभी “छोटे-छोटे नामों में छिपी बड़ी लूट” हैं।

सरकार और RBI से क्या मांग?

Reserve Bank of India और सरकार से राघव चड्ढा की प्रमुख मांगें:

सभी मिनिमम बैलेंस पेनल्टी तुरंत खत्म की जाए

छोटे खातों पर कोई हिडन चार्ज न लगाया जाए

बैंकिंग सिस्टम को गरीबों के लिए ज्यादा संवेदनशील बनाया जाए

मुद्दे की गंभीरता क्यों है ज्यादा?

भारत में “फाइनेंशियल इन्क्लूजन” (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों लोगों के बैंक खाते खोले गए। लेकिन अगर उन्हीं खातों पर लगातार चार्जेस लगते रहेंगे, तो यह योजना अपने उद्देश्य से भटक सकती है।

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