पिथौरागढ़/धारचूला: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र धारचूला में ब्लॉक प्रमुख पद को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि ब्लॉक प्रमुख के पद पर चुनी गई महिला के भारतीय अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
RTI के बाद उठे सवाल
सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए सामने आई कुछ जानकारियों के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि संबंधित ब्लॉक प्रमुख का पारिवारिक और संपत्ति संबंध नेपाल से जुड़ा हुआ है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि उनके पिता और पारिवारिक संपत्ति नेपाल में बताई जा रही है, जबकि उन्हें भारत में अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इस मुद्दे ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है।
विधायक हरीश धामी ने उठाया मुद्दा
धारचूला के विधायक Harish Dhami ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति ने गलत तरीके से आरक्षण का लाभ लिया है तो यह स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
भाजपा नेता ने भी जांच की बात कही
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता Munna Singh Chauhan ने कहा कि यदि आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और उचित प्रक्रिया के तहत जांच कराई जाएगी।
सीमांत क्षेत्र होने के कारण संवेदनशील मामला
धारचूला नेपाल सीमा से सटा हुआ इलाका है, जहां दोनों देशों के लोगों के बीच पारिवारिक और सामाजिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। इसी कारण कई बार नागरिकता, भूमि और दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में दस्तावेजों की जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया बेहद सावधानी से की जानी चाहिए।
सरकार की चुप्पी पर विपक्ष हमलावर
विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस मामले में स्पष्ट बयान देने से बच रही है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह आरक्षण व्यवस्था और स्थानीय अधिकारों के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि शिकायत औपचारिक रूप से दर्ज होती है तो दस्तावेजों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई संभव है।
क्या होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल यह मामला आरोप और राजनीतिक बयानबाजी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि इस पर आधिकारिक जांच शुरू होती है तो दस्तावेजों की वैधता और नागरिकता से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमांत क्षेत्र में उठे इस विवाद का असर आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
