देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित Ankita Bhandari हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। राज्य की बेटी अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था, लेकिन घटना के कई साल बाद भी न्याय को लेकर उठ रही आवाजें थमती नजर नहीं आ रही हैं। इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि जहां एक ओर इस मामले पर अब खामोशी दिखाई दे रही है, वहीं चुनावी माहौल में वोट की राजनीति पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है।
2022 में पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित एक निजी रिसॉर्ट में काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था और लोगों ने सख्त कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस जांच के बाद मुख्य आरोपी Pulkit Arya समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया और मामला अदालत में पहुंचा।
हालांकि समय बीतने के साथ यह सवाल लगातार उठता रहा है कि आखिर उत्तराखंड की बेटी को अब तक पूरी तरह न्याय क्यों नहीं मिल पाया। राज्य के कई सामाजिक संगठनों और आम लोगों का मानना है कि इस मामले की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
इधर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि जैसे-जैसे चुनावी गतिविधियां तेज होती हैं, नेताओं की सक्रियता भी बढ़ जाती है। लेकिन अंकिता भंडारी जैसे संवेदनशील मामलों पर पहले जैसी राजनीतिक और प्रशासनिक सक्रियता नजर नहीं आती।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सरकार और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी सिर्फ बयान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पीड़ित को समय पर न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
फिलहाल अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन उत्तराखंड के लोगों के मन में एक ही सवाल बार-बार उठ रहा है—
क्या राज्य की बेटी को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी राजनीतिक शोर के बीच कहीं दब कर रह जाएगा?
