नैनीताल/हल्द्वानी। एस्कार्ट फार्म की भूमि से जुड़े विभिन्न रिट याचिकाओं पर आज उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने पक्षकारों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद कई महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किए।
बताया जा रहा है कि एस्कार्ट फार्म की सैकड़ों एकड़ भूमि के स्वामित्व, उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज़), और राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टियों को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कुछ याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भूमि के हस्तांतरण और नामांतरण की प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं, जबकि प्रतिवादियों ने सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार होने का दावा किया।
क्या रहे न्यायालय के प्रमुख निर्देश
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संबंधित जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से विस्तृत जवाब-तलब किया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि:
भूमि से संबंधित सभी अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां अगली तिथि तक प्रस्तुत की जाएं।
विवादित भूमि पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखी जाए।
बिना न्यायालय की अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण या भू-उपयोग परिवर्तन न किया जाए।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पक्षकारों की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि किसानों और स्थानीय निवासियों के अधिकारों की अनदेखी की गई है। वहीं, एस्कार्ट फार्म प्रबंधन की ओर से कहा गया कि भूमि का अधिग्रहण और हस्तांतरण पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय कक्ष में दोनों पक्षों के समर्थकों की मौजूदगी भी देखने को मिली, हालांकि व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात रहा।
अगली सुनवाई की तिथि
न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
एस्कार्ट फार्म भूमि प्रकरण को क्षेत्र में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा माना जा रहा है। न्यायालय के ताजा आदेश के बाद अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
