जिला मुख्यालय।
जिले में बढ़ती वनाग्नि की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी (डीएम) ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। डीएम ने वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की और कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम ने स्पष्ट किया कि जंगलों में आग लगने से पर्यावरण, वन्यजीवों और ग्रामीणों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। गर्मी के मौसम में छोटी सी चिंगारी भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष गश्त बढ़ाई जाए।
जिम्मेदारों की होगी पहचान
बैठक में निर्देश दिए गए कि आग लगाने की घटनाओं में शामिल व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ वन अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। डीएम ने कहा कि कई बार जानबूझकर या लापरवाही से आग लगाई जाती है, जिससे हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में उदाहरण पेश करने के लिए कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान
डीएम ने वन विभाग को ग्राम प्रधानों और वन पंचायतों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे जंगलों में सूखी पत्तियों को जलाने, बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े फेंकने या अन्य किसी भी तरह की लापरवाही से बचें। स्कूलों और स्वयंसेवी संगठनों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
त्वरित प्रतिक्रिया दल सक्रिय
वनाग्नि की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। फायर वॉच टावरों से निगरानी बढ़ाई गई है और कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रहेगा। डीएम ने कहा कि यदि कहीं आग की सूचना मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित किया जाए, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।
नुकसान का आकलन
वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि हाल की आग की घटनाओं से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। जिन क्षेत्रों में बार-बार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, वहां विशेष रणनीति अपनाई जाएगी।
अंत में डीएम ने आमजन से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जंगल हमारी साझा धरोहर हैं। इन्हें सुरक्षित रखना प्रशासन के साथ-साथ हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
