देहरादून। उत्तराखंड के ऊर्जा विभाग को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने ऊर्जा विभाग में “सुनियोजित भ्रष्टाचार” का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग में ठेकों के आवंटन, उपकरण खरीद और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रेस वार्ता में आर्य ने आरोप लगाया कि ऊर्जा परियोजनाओं की लागत लगातार बढ़ाई जा रही है और कार्यों की गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न हैं। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रहीं, जबकि बजट का बड़ा हिस्सा खर्च दिखाया जा चुका है। आर्य ने मांग की कि ऊर्जा विभाग के सभी प्रमुख टेंडरों और भुगतान की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ाया जा रहा है, लेकिन सेवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। आर्य ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली आपूर्ति में कटौती और तकनीकी खामियों के बावजूद जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।
आर्य ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता को लेकर गंभीर है तो वह ऊर्जा विभाग के पिछले पांच वर्षों के सभी बड़े अनुबंधों और खरीद प्रक्रियाओं को सार्वजनिक करे। उन्होंने यह भी मांग की कि विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराई जाए ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके।
वहीं, सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों के अनुसार, विभागीय अधिकारी सभी प्रक्रियाओं को नियमानुसार और पारदर्शी बता रहे हैं। उनका कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं और सुधार की प्रक्रिया जारी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र से पहले ऊर्जा विभाग को लेकर उठे ये आरोप आगामी दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकते हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और क्या किसी प्रकार की जांच की घोषणा की जाती है या नहीं
