हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय (STH) में पिछले छह माह के भीतर छह डॉक्टरों के इस्तीफे से स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार हो रही चिकित्सकों की कमी से मरीजों और तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले डॉक्टर अलग-अलग विभागों से जुड़े थे। कुछ ने निजी संस्थानों में बेहतर अवसर मिलने का हवाला दिया, तो कुछ ने कार्यभार और संसाधनों की कमी को कारण बताया।

मरीजों पर असर

डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। कई विभागों में मरीजों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। दूर-दराज़ से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

प्रशासन की सफाई

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है और शासन स्तर पर नए डॉक्टरों की नियुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर कार्यपरिस्थितियां और प्रोत्साहन न मिलने के कारण डॉक्टर निजी क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं। यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो मरीजों को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने शासन से मांग की है कि अस्पताल में जल्द से जल्द स्थायी नियुक्तियां की जाएं, ताकि कुमाऊं क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।

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