देहरादून/नई दिल्ली।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर किसान संगठनों में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है। किसान मंच, उत्तराखंड ने इस डील को किसान विरोधी और देश की कृषि के लिए घातक बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है।
किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने जारी बयान में कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के नाम पर देश के अन्नदाता के हितों के साथ समझौता किया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह डील अमेरिका के दबाव में तैयार की जा रही प्रतीत होती है, जिसमें भारतीय किसानों की चिंता, MSP, खाद्य सुरक्षा और छोटे-सीमांत किसानों के भविष्य को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
उन्होंने कहा—
“भारत सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि वह किसी भी हालत में अमेरिका या किसी भी विदेशी ताकत के आगे झुककर देश की खेती और किसानों को बर्बाद नहीं करेगी। यह डील अगर लागू हुई तो इसका सबसे बड़ा नुकसान छोटे किसानों, पहाड़ी किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा।”
कार्तिक उपाध्याय ने आरोप लगाया कि ट्रेड डील के तहत सस्ते विदेशी कृषि उत्पाद, अनाज, फल और डेयरी उत्पाद भारत में आने का रास्ता खुलेगा, जिससे भारतीय किसान अपनी ही जमीन पर प्रतिस्पर्धा में हार जाएगा। इससे MSP और सरकारी खरीद व्यवस्था कमजोर होगी और किसान खुले बाजार के रहमो-करम पर छोड़ दिया जाएगा।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां खेती पहले ही लागत, बाजार और संसाधनों के संकट से जूझ रही है। ऐसे में यह ट्रेड डील पलायन को और तेज करेगी और पहाड़ की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह तोड़ देगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा—
“हम स्पष्ट मांग करते हैं कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए।
MSP को कानूनी गारंटी दी जाए और किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले किसानों से खुली चर्चा की जाए।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने किसानों की आवाज़ को अनसुना किया, तो किसान मंच उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक आंदोलन छेड़ने को मजबूर होगा।
अंत में उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसी एक समझौते की नहीं, बल्कि देश की खेती, खाद्य सुरक्षा और किसान के स्वाभिमान की लड़ाई है, जिसमें किसान मंच पीछे हटने वाला नहीं है।
