हरिद्वार | 08 फरवरी 2026

 

हरिद्वार की पवित्र भूमि एक बार फिर न्याय बनाम सत्ता-संरक्षण की निर्णायक लड़ाई का साक्षी बन रही है। मातृ सदन, हरिद्वार में चल रहा ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद जी का अविछिन्न अनशन आज 9वें दिन में प्रवेश कर गया है। शनिवार को प्रशासन और पुलिस के प्रतिनिधि वार्ता के लिए मातृ सदन पहुंचे, लेकिन उनकी ओर से मांगों पर किसी भी प्रकार का ठोस आश्वासन या कार्रवाई की मंशा न दिखने के कारण ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद जी ने अनशन जारी रखने की घोषणा की।

 

 

मातृ सदन ने अपने प्रेस नोट में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जनपद हरिद्वार में शासन-प्रशासन के भीतर गहरे तक पैठ बना चुका भ्रष्टाचार, भू-माफियाओं को खुला प्रशासनिक व पुलिसिया संरक्षण और जनहित में आवाज उठाने वालों के विरुद्ध झूठे मुकदमों का सिलसिला लगातार जारी है। यह आंदोलन इन्हीं मुद्दों के विरुद्ध जनहित में उठाई जा रही निर्णायक आवाज है।

 

 

प्रेस नोट में विशेष रूप से एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल और स्वामी यतीश्वरानंद के नामों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इनके संरक्षण में जनपद हरिद्वार में विधि-विरुद्ध गतिविधियां, अवैध भू-उपयोग परिवर्तन, बागों का कटान, अवैध कॉलोनियों का निर्माण और अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है। मातृ सदन का कहना है कि इन सभी मामलों में दस्तावेजी प्रमाण एक के बाद एक सामने आ रहे हैं, जिसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

 

नूरपुर पंजनहेड़ी कांड से उजागर हुआ पुलिस संरक्षण

28 जनवरी 2026 को ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी, तहसील व जिला हरिद्वार में घटित हिंसक घटना को मातृ सदन ने पुलिसिया पक्षपात और माफिया संरक्षण का ज्वलंत उदाहरण बताया है। आरोप है कि घटना के बाद पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई पहली तहरीर पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जबकि प्रभावशाली पक्ष के कथनों के आधार पर लगभग दो घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई।

 

 

इसके बाद 30 जनवरी को पीड़ित पक्ष की ओर से पुनः तहरीर दी गई, जिस पर देर रात कम गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन अब तक वास्तविक हमलावरों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मातृ सदन का कहना है कि पुलिस के पास घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद जानलेवा हमले को अंजाम देने वालों पर कार्रवाई न किया जाना बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

 

मातृ सदन ने स्पष्ट किया कि यह हमला पूर्व नियोजित आपराधिक षड्यंत्र और हत्या की मंशा से किया गया, जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई आत्मरक्षा की श्रेणी में आती है, जिसे पुलिस जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है।

 

एसएसपी कार्यालय के भीतर खुलेआम दबाव, कानून की अनदेखी

 

प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि नामजद आरोपी और भू-माफिया खुलेआम एसएसपी कार्यालय के भीतर बैठकर पीड़ित पक्ष की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। मातृ सदन ने इसे या तो जमानत शर्तों का उल्लंघन बताया है, या फिर इस बात का प्रमाण कि अब तक पुलिस ने उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई शुरू ही नहीं की। दोनों ही स्थितियां पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

 

अवैध भू-उपयोग परिवर्तन उत्तराखंड के अस्तित्व पर खतरा

 

मातृ सदन ने हरिद्वार में धारा 143 जमींदारी उन्मूलन अधिनियम के तहत बड़े पैमाने पर अवैध भू-उपयोग परिवर्तन, बागों के कटान और कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने को उत्तराखंड के भविष्य के लिए घातक बताया है। प्रेस नोट में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में इसी प्रकार के मामलों में तत्कालीन जिलाधिकारी और उप-जिलाधिकारी तक को निलंबित होना पड़ा था, बावजूद इसके यह अवैध प्रक्रिया आज भी जारी है।

मातृ सदन ने चेतावनी दी है कि यदि इस पर तत्काल रोक नहीं लगी तो यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के साथ-साथ पहाड़ी राज्य के विनाश की नींव रखेगा।

 

 

एसएसपी की संपत्ति में असामान्य वृद्धि पर सवाल

 

प्रेस नोट में एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल की 2021 से 2024 के बीच घोषित संपत्ति में कई गुना वृद्धि, एक कथित गिफ्ट डीड, श्यामपुर कांगड़ी क्षेत्र में निर्माणाधीन विशाल महलनुमा भवन और पारिवारिक संपत्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मातृ सदन ने स्पष्ट किया है कि ये सभी आरोप दस्तावेजी प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किए जा रहे हैं और इसकी गहन, निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच अत्यंत आवश्यक है।

 

मातृ सदन का स्पष्ट संदेश

 

मातृ सदन ने दो टूक कहा है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि हरिद्वार और पूरे उत्तराखंड के अस्तित्व, कानून व्यवस्था और न्याय की रक्षा के लिए है।

“जब तक सभी बिंदुओं पर हाई-लेवल कमिटी द्वारा निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक मातृ सदन का आंदोलन और ब्रह्मचारी आत्मबोधनंद जी का अनशन जारी रहेगा। यह न्याय का प्रश्न है और इससे कोई समझौता नहीं होगा।”

 

हरिद्वार में यह आंदोलन अब पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी और उदाहरण बनता जा रहा है। प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा हो चुका है, और निगा

हें शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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