हरिद्वार, 31 जनवरी 2026।
मातृ सदन, हरिद्वार में शनिवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता ने उत्तराखंड की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए। बड़ी संख्या में मीडिया कर्मियों और चिंतित नागरिकों की मौजूदगी में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून का राज कमजोर पड़ता जा रहा है और शासन-प्रशासन पर माफिया तत्वों के प्रभाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।
प्रेस वार्ता में यह घोषणा की गई कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ब्रह्मचारी आत्मबोधनन्द ने आज से अनिश्चितकालीन अनशन प्रारंभ कर दिया है। अनशन से जुड़ी मांगें पूर्व में प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को भेजी जा चुकी हैं।
परम पूज्य श्री गुरुदेव स्वामी श्री शिवानंद जी महाराज ने 28 जनवरी 2026 को ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी में हुई घटना का जिक्र करते हुए पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए।
उन्होंने पूछा कि क्या घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज जब्त की गई है, और यदि हां, तो अब तक उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
प्रेस वार्ता में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या घटना पूर्व नियोजित थी और क्या संबंधित पक्ष घातक हथियारों से लैस होकर पहले से ही तैयार थे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक वाहन के पहले से मौजूद होने और समय पर पुलिस को सूचना न दिए जाने से पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा हो जाता है।
अमित चौहान एवं उनके सहयोगियों, साथ ही एचआरडीए सचिव मनीष कुमार और तहसीलदार सचिन कुमार के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत अब तक कार्रवाई न होने पर भी नाराज़गी जताई गई।
अतुल चौहान की स्कोडा कार को नुकसान पहुंचाने और मौके से इलेक्ट्रिक स्कूटी गायब होने को लेकर भी पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए गए।
पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी और चोटों के विवरण को लेकर भी विरोधाभासों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने दावा किया कि अधिकारियों के बयानों में बार-बार बदलाव से संदेह की स्थिति और गहराती जा रही है। यह आशंका भी व्यक्त की गई कि कहीं चोटों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर एक पक्ष के विरुद्ध झूठा मामला खड़ा करने की कोशिश तो नहीं हो रही।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि ब्रह्मचारी सुधानन्द की शिकायत अब तक दर्ज न किया जाना, नाबालिग के साथ कथित पुलिस बर्बरता पर कार्रवाई का अभाव और मामले को स्वतंत्र जांच एजेंसी को न सौंपना प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।
मातृ सदन की ओर से दावा किया गया कि उनके पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो साक्ष्य इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई उजागर करने के लिए पर्याप्त हैं।
वक्ताओं ने कहा कि यदि आत्मरक्षा में कोई कदम उठाया गया हो, तो उसे अपराध नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब हमला योजनाबद्ध हो और प्रशासन निष्क्रिय बना रहे।
प्रेस वार्ता में श्री अतुल चौहान की पत्नी श्रीमती शिखा चौहान ने अपने पति और पुत्र के लिए न्याय की मांग करते हुए भावुक अपील की। किसान नेता भोपाल सिंह चौधरी, उत्तराखंड क्रांति दल के नेता कैप्टन राकेश ध्यानी और किसान नेता कार्तिक उपाध्याय सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने मातृ सदन के सत्याग्रह को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
मातृ सदन ने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, सत्याग्रह और अनशन जारी रहेगा। हरिद्वार की इस हलचल ने एक बार फिर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता पर व्यापक बहस छेड़ दी है।
