“सोने की चिड़िया” से सोना खरीदने से बचने की अपील तक: आखिर भारत की अर्थव्यवस्था में क्या बदल गया?
कभी दुनिया भारत को “सोने की चिड़िया” कहती थी। आज वही भारत अपने नागरिकों से एक साल तक गैर-जरूरी सोना न खरीदने की अपील कर रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया बयान ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है—क्या भारत की अर्थव्यवस्था पर इतना दबाव है कि सरकार को लोगों से सोना खरीदने तक रोकने की अपील करनी पड़ रही है?
भारत को “सोने की चिड़िया” इसलिए कहा जाता था क्योंकि सदियों तक यह दुनिया की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा। मसाले, वस्त्र, हीरे-जवाहरात, कृषि और व्यापार के कारण भारत में अपार संपदा आती थी। विदेशी व्यापारी यहां सोना-चांदी लेकर आते थे और भारत से सामान ले जाते थे। मंदिरों, राजघरानों और व्यापारियों के पास भारी मात्रा में स्वर्ण भंडार हुआ करता था।
लेकिन समय बदला। विदेशी आक्रमण, औपनिवेशिक शासन और वैश्विक आर्थिक बदलावों ने भारत की आर्थिक संरचना बदल दी। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Gold Importers में शामिल है और देश अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से खरीदता है।
इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल में लोगों से अपील की कि वे “एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचें।” इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भारत पर बढ़ता Import Bill और Foreign Exchange दबाव बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत हर साल 700-800 टन तक सोना खरीदता है और इसका बड़ा हिस्सा आयात होता है। FY26 में भारत का Gold Import Bill लगभग 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार समस्या सिर्फ सोने की नहीं है। भारत पहले से ही भारी मात्रा में Crude Oil भी आयात करता है। Middle East तनाव, बढ़ती तेल कीमतें और डॉलर पर दबाव के बीच यदि सोने का आयात भी लगातार बढ़ता रहा, तो इसका असर सीधे भारतीय रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है।
World Gold Council की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि सरकार ने हाल में Gold Import Duty 6% से बढ़ाकर 15% तक कर दी और साथ ही सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए हैं।
सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे देशहित में जरूरी कदम बताया, जबकि कई लोगों ने सवाल उठाया कि भारत जैसे देश में, जहां सोना सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि “सुरक्षा और बचत” का प्रतीक माना जाता है, वहां ऐसी अपील कितनी प्रभावी होगी।
आर्थिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ “सोना खरीदने” का मामला नहीं, बल्कि भारत की बदलती आर्थिक चुनौतियों का संकेत है। कभी जिस देश में दुनिया का सोना आता था, आज वही देश विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से सोने की खरीद कम करने की अपील कर रहा है।
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