देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल के तहत राज्य के पहले मॉडर्न मदरसे को आधिकारिक मान्यता प्रदान कर दी गई है। इस कदम को पारंपरिक धार्मिक शिक्षा और आधुनिक पाठ्यक्रम के समन्वय की दिशा में अहम माना जा रहा है।
मान्यता मिलने के बाद अब इस मदरसे में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, कंप्यूटर शिक्षा और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय भी नियमित रूप से पढ़ाए जाएंगे। राज्य सरकार और संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसे “समावेशी और संतुलित शिक्षा मॉडल” बताया है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा संस्थान
मदरसे में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय और प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। छात्रों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाई का अवसर मिलेगा, जिससे वे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल राज्य में मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में अन्य मदरसों को भी इसी मॉडल पर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह
मान्यता की खबर के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों में खुशी का माहौल है। अभिभावकों का कहना है कि अब उनके बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों की पढ़ाई भी एक ही परिसर में मिल सकेगी, जिससे उनका भविष्य और अधिक सुरक्षित होगा।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे शिक्षा का स्तर सुधरेगा और समाज के सभी वर्गों को समान अवसर मिलेंगे।
सरकार का उद्देश्य
राज्य सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाना है, ताकि हर समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध हो सके। इस पहल से प्रदेश में शिक्षा सुधार की दिशा में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी मॉडर्न मदरसों की स्थापना की जा सकती है।
