राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड की पंचम विधानसभा का वर्ष 2026 का प्रथम बजट सत्र आगामी 9 मार्च से भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में आयोजित किया जाएगा। विधानसभा सचिवालय द्वारा इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना जारी होते ही सरकार और शासन स्तर पर सत्र की तैयारियां तेज हो गई हैं।

कैबिनेट ने बजट सत्र के आयोजन को लेकर निर्णय का अधिकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपा था। मुख्यमंत्री ने परंपरा और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सत्र को गैरसैंण में ही आयोजित करने का निर्णय लिया। उल्लेखनीय है कि गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा प्राप्त है और यहां सत्र आयोजित करना पहाड़ की भावनाओं से भी जुड़ा विषय माना जाता है।

2026-27 का बजट होगा पेश

इस बजट सत्र में राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का आम बजट प्रस्तुत करेगी। माना जा रहा है कि बजट में बुनियादी ढांचे के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा सुधार, पर्यटन संवर्धन और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस रहेगा। इसके अलावा सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और वित्तीय प्रस्ताव भी सदन में रख सकती है।

सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, पलायन, आपदा प्रबंधन और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसे जनहित के मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाए जाने की संभावना है। ऐसे में सदन में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

गैरसैंण में प्रशासनिक तैयारियां तेज

विधानसभा सत्र को लेकर गैरसैंण में प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों ने सुरक्षा, आवास, यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी है। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और मीडिया कर्मियों के ठहरने की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है, वहीं लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियां भवन और आसपास के क्षेत्रों की मरम्मत व साफ-सफाई के कार्य में जुट गई हैं।

पहाड़ की राजनीति का केंद्र बनेगा गैरसैंण

गैरसैंण में बजट सत्र का आयोजन हमेशा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह न केवल पहाड़ और मैदान के संतुलन का प्रतीक है, बल्कि राज्य की क्षेत्रीय आकांक्षाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे में 9 मार्च से शुरू होने वाला यह सत्र राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से कई मायनों में अहम साबित हो सकता है।

अब सभी की निगाहें बजट के प्रावधानों और सदन में होने वाली चर्चाओं पर टिकी हैं, जो आगामी वित्तीय वर्ष की दिशा तय करेंगी।

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