राजस्व गांव के दर्जे की मांग पर तहसील घेराव, सरकार को साफ संदेश
लालकुआँ (जनपद नैनीताल) — बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग को लेकर बुधवार को लालकुआँ की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। “अबकी बार आर-पार” और “हक़ नहीं तो आंदोलन तेज़” जैसे नारों के बीच हजारों ग्रामीण, महिलाएँ और युवा बिंदुखत्ता से तहसील तक मार्च करते हुए पहुंचे।
संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में निकले इस जुलूस ने तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भीड़ का आकार और तेवर साफ संकेत दे रहे थे कि यह संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
*वर्षों का संघर्ष, अब अंतिम चेतावनी*
ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व गांव का दर्जा न होने से भूमि संबंधी अधिकार, प्रमाणपत्र, सरकारी योजनाओं का लाभ और प्रशासनिक सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। उनका तर्क है कि राजस्व गांव घोषित होने से क्षेत्र के विकास और अधिकारों का रास्ता साफ होगा।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अधिसूचना चाहिए। यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।
*बाजार बंद, व्यापक समर्थन*
आंदोलन के समर्थन में कई व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने इस आंदोलन को जनांदोलन का स्वरूप दे दिया।
प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए थे और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
*अब सरकार की अग्निपरीक्षा*
बिंदुखत्ता की मांग अब सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह अधिकार और सम्मान की लड़ाई बन चुकी है। आज का प्रदर्शन सरकार के लिए स्पष्ट संदेश है — बिंदुखत्ता अब इंतज़ार नहीं करेगा।
