- खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की उठाई मांग, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
देहरादून/खटीमा।
उत्तराखंड में लगातार गहराते जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर उपनेता प्रतिपक्ष एवं खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश में चल रहे ज्वलंत विषयों पर चर्चा के लिए उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र तत्काल बुलाने की मांग की है।
पत्र में भुवन कापड़ी ने कहा है कि वर्तमान समय में उत्तराखंड अनेक ऐसे गंभीर संकटों से गुजर रहा है, जिनसे आम जनता में गहरी चिंता और असंतोष व्याप्त है। इन मुद्दों पर न तो पर्याप्त विमर्श हो रहा है और न ही ठोस नीति निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे जनभावनाएं आहत हो रही हैं।
भूमि अधिकार और विस्थापन का मुद्दा प्रमुख
विधायक कापड़ी ने अपने पत्र में सबसे पहले सरकारी भूमि और वन भूमि पर दशकों से निवास कर रहे गरीब, श्रमिक और भूमिहीन परिवारों की समस्या को उठाया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से निवास करने के बावजूद आज तक हजारों परिवारों को भूमि अधिकार नहीं मिल पाए हैं।
भगवान-54, ऋषिकेश, रुद्रपुर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को अतिक्रमणकारी बताकर उजाड़ने की कार्रवाई की जा रही है, जो न केवल अमानवीय है बल्कि गंभीर जनहित का विषय भी है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल नीति निर्धारण करने की मांग की है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड पर फिर उठी CBI जांच की मांग
भुवन कापड़ी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश की जनता आज भी निष्पक्ष और स्वतंत्र न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। जांच प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, जिससे जनविश्वास कमजोर हुआ है।
उन्होंने मांग की कि इस मामले में CBI जांच कराई जाए और माननीय उच्च न्यायालय के पर्यवेक्षण में न्यायिक निगरानी के तहत जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात, दबाव या साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका न रहे।
कानून व्यवस्था पर जताई गहरी चिंता
पत्र में प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। हत्या, बलात्कार, चोरी, नशे का अवैध कारोबार, अवैध खनन और अन्य आपराधिक घटनाओं में लगातार वृद्धि को विधायक ने अत्यंत चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि इससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है, जो राज्य के सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा है।
विशेष सत्र को बताया आवश्यक
भुवन कापड़ी ने स्पष्ट किया कि इन सभी ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर चर्चा, जवाबदेही तय करने और ठोस निर्णय लेने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल इसी माध्यम से जनता की समस्याओं का लोकतांत्रिक और न्यायोचित समाधान संभव है।
सरकार पर बढ़ता दबाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष द्वारा विशेष सत्र की मांग से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। भूमि अधिकार, अंकिता हत्याकांड और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे पहले से ही जनता के बीच संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मांग को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा सकता है।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस पत्र पर क्या रुख अपनाती है और क्या वास्तव में जनता से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर विधानसभा के विशेष सत्र की पहल की जाती है

