चम्पावत | 20 मार्च 2026

उत्तराखंड के चम्पावत जिले के पाटी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पीपलढ़ीग में आज ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। बढ़ते पेयजल बिलों के विरोध में पूरे गांव ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ तीखी नाराज़गी जताई।

ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा —

“अब यह अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा।”

क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन काम पूरी तरह से मानकों के अनुरूप नहीं हुआ।

आरोप लगाए गए कि:

नई पाइपलाइन डालने के बजाय पुराने पाइपों को काटकर कनेक्शन दे दिए गए

गांव के पुराने सार्वजनिक नलों को बंद कर दिया गया

अब उसी पानी के लिए भारी-भरकम बिल भेजे जा रहे हैं

“पहले सुविधा छीनी, फिर बिल थोप दिया”

ग्रामीणों का कहना है कि पहले सरकार ने मुफ्त या सस्ती पानी की व्यवस्था खत्म कर दी, और अब अधूरी सुविधा के बावजूद बिल थोपे जा रहे हैं।

गांव के एक बुजुर्ग किसान ने कहा:

हम मजदूरी करके पेट पालते हैं, इतना महंगा पानी कैसे भरेंगे?”

गरीबों पर बढ़ता आर्थिक बोझ

पीपलढ़ीग एक अनुसूचित बाहुल्य गांव है, जहां अधिकांश लोग खेती और दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। ऐसे में बढ़ते पानी के बिल उनके लिए बड़ी समस्या बन गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि:

यह सिर्फ बिल नहीं, बल्कि गरीबों पर आर्थिक दबाव है

कई परिवार बिल भरने की स्थिति में नहीं हैं

ग्रामीणों की मुख्य मांगें

पुराने सार्वजनिक नलों को तुरंत चालू किया जाए

पानी के बिलों में राहत या कटौती दी जाए

योजना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो

बड़ा सवाल

क्या विकास योजनाएं वास्तव में जनता के लिए हैं?

या सिर्फ कागजों में “सफल” दिखाने के लिए?

पीपलढ़ीग की यह आवाज अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों ग्रामीण इलाकों की सच्चाई को दर्शाती है जहां योजनाओं का लाभ जमीन तक नहीं पहुंच रहा।

किसान मंच भी आया सामने

किसान मंच के ब्लॉक अध्यक्ष सूरज ने इस मुद्दे को गंभीर बताया और कहा:

“जल्द ही उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा और मामले की जांच कुमाऊँ कमिश्नर के माध्यम से कराने की मांग उठाई जाएगी।”

बढ़ सकता है आंदोलन

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह विरोध आंदोलन का रूप ले सकता है

error: Content is protected !!