DMF के खर्च पर उत्तराखंड में तेज हुई पारदर्शिता की मांग: बागेश्वर के आंदोलन को किसान मंच का समर्थन, नैनीताल समेत सभी जिलों का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

बागेश्वर/नैनीताल। उत्तराखंड में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) की धनराशि के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवाल अब बागेश्वर तक सीमित नहीं रह गए हैं। बागेश्वर में DMF फंड के उपयोग में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे वरिष्ठ नेता बसंत कुमार को किसान मंच उत्तराखंड ने समर्थन दिया है। इसके साथ ही किसान मंच ने मांग उठाई है कि केवल बागेश्वर ही नहीं, बल्कि नैनीताल सहित प्रदेश के सभी जिलों में DMF से प्राप्त और खर्च की गई धनराशि का पूरा ब्यौरा जनता के सामने रखा जाए।

बागेश्वर में बसंत कुमार और उनके साथ आंदोलन कर रहे लोगों की ओर से DMF की धनराशि के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। आंदोलन के माध्यम से कार्यों के चयन, स्वीकृति और खर्च में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।

इसी बीच किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय ने नैनीताल से वीडियो संदेश जारी कर बसंत कुमार द्वारा उठाई जा रही जांच और पारदर्शिता की मांग को समर्थन दिया है।

किसान मंच ने स्पष्ट किया है कि संगठन गैर-राजनीतिक है और उसका किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है, लेकिन सार्वजनिक धन और जनहित से जुड़े मामलों में वह दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर सही मांग के साथ खड़ा रहेगा।

‘DMF प्रभावित जनता का हक, किसी की निजी सुविधा का फंड नहीं’

किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि किसान मंच पिछले कुछ महीनों से DMF के मूल उद्देश्य, नियमों और अलग-अलग जिलों में इसके क्रियान्वयन का अध्ययन कर रहा है। इस दौरान संगठन के सामने कई ऐसे सवाल और शिकायतें आई हैं जिनकी दस्तावेजी जांच आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि DMF की धनराशि का प्राथमिक उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाली आबादी के हित में काम करना है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि करोड़ों रुपये की धनराशि वास्तव में किन क्षेत्रों और किन कार्यों पर खर्च की गई तथा उससे खनन प्रभावित जनता को कितना लाभ मिला।

किसान मंच ने निजी पहुंच मार्गों जैसे कार्यों में DMF की धनराशि इस्तेमाल किए जाने संबंधी शिकायतों को भी गंभीर जांच का विषय बताया है। संगठन का कहना है कि यदि सार्वजनिक धन से किसी चुनिंदा व्यक्ति, राजनीतिक कार्यकर्ता या प्रभावशाली व्यक्ति को निजी लाभ पहुंचाने की शिकायत सामने आती है तो संबंधित कार्य की संस्तुति और स्वीकृति से लेकर भुगतान तथा मौके की वर्तमान स्थिति तक की जांच होनी चाहिए।

प्रभारी मंत्रियों की सिफारिशों पर भी उठाए सवाल

किसान मंच ने DMF में कार्यों के चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। संगठन चाहता है कि यह सार्वजनिक किया जाए कि संबंधित कार्य वास्तविक खनन प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकता और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर चुने गए या प्रभारी मंत्रियों अथवा अन्य राजनीतिक स्तर से आई संस्तुतियों और निर्देशों के आधार पर उन्हें प्राथमिकता दी गई।

किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय का कहना है कि यदि किसी मंत्री, जनप्रतिनिधि या अन्य स्तर की संस्तुति पर कार्य स्वीकृत किया गया तो उससे संबंधित रिकॉर्ड भी जनता के सामने होना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित कार्य DMF के निर्धारित उद्देश्यों और पात्रता के अनुरूप था या नहीं।

नैनीताल की RTI में लिफ्ट मरम्मत पर DMF खर्च की जानकारी

किसान मंच ने नैनीताल में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत DMF से जुड़ी जानकारियां भी मांगी हैं। संगठन के मुताबिक प्राप्त RTI सूचना में लिफ्ट की मरम्मत के लिए भी DMF की धनराशि इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इसके बाद किसान मंच ने सवाल उठाया है कि संबंधित लिफ्ट कहां स्थित है, मरम्मत पर कितनी धनराशि खर्च हुई, किस प्रस्ताव और स्वीकृति के आधार पर कार्य कराया गया तथा इसे DMF के उद्देश्यों के अनुरूप मानने का आधार क्या था।

मंच का कहना है कि वह RTI और अन्य सरकारी अभिलेखों के माध्यम से DMF से हुए खर्च की दस्तावेजी पड़ताल आगे भी जारी रखेगा।

स्कूल, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल की जरूरतों के बीच पैसा कहां खर्च हुआ

किसान मंच ने प्रदेश के खनन प्रभावित इलाकों की बुनियादी समस्याओं को भी इस मुद्दे से जोड़ा है। संगठन का कहना है कि आज भी अनेक क्षेत्रों में सरकारी विद्यालय बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है, ग्रामीण सड़कें बदहाल हैं और कई गांव पेयजल समेत दूसरी मूलभूत समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

ऐसी परिस्थितियों में जनता को यह जानने का अधिकार है कि DMF में प्राप्त करोड़ों रुपये में से कितना पैसा स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क, पर्यावरण संरक्षण और खनन से सीधे प्रभावित आबादी की जरूरतों पर खर्च किया गया।

किसान मंच के समर्थन पर बसंत कुमार ने जताया आभार

किसान मंच का समर्थन मिलने के बाद बसंत कुमार ने संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया है।

बसंत कुमार ने कहा कि किसान मंच ने नैनीताल से वीडियो संदेश के माध्यम से इस जनहित की लड़ाई को समर्थन दिया है और यह समर्थन संघर्ष को और मजबूती से आगे बढ़ाने की शक्ति देता है।

उन्होंने कहा कि DMF के एक-एक रुपये का हिसाब मिलने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होने तक उनकी आवाज बुलंद रहेगी।

बसंत कुमार ने किसान मंच द्वारा नैनीताल में लगाई गई RTI से लिफ्ट की मरम्मत में DMF फंड इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आने का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि खनन प्रभावित ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतों, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क और पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्धारित धनराशि आखिर किन कार्यों पर और किस आधार पर खर्च की गई।

बागेश्वर ही नहीं, पूरे उत्तराखंड के DMF की जांच की मांग

किसान मंच ने अब इस मुद्दे को प्रदेशव्यापी स्तर पर उठाते हुए बागेश्वर और नैनीताल सहित उत्तराखंड के सभी जिलों में DMF से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

संगठन चाहता है कि प्रत्येक जिले का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए—DMF में कितना पैसा आया, कितना खर्च हुआ, किसकी संस्तुति पर कौन-सा कार्य स्वीकृत हुआ, किस विभाग अथवा एजेंसी ने कार्य कराया, कितना भुगतान किया गया और वर्तमान में संबंधित कार्य की जमीनी स्थिति क्या है।

प्रदेश अध्यक्ष किसानपुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा—

“DMF किसी सरकार, मंत्री, अधिकारी या राजनीतिक कार्यकर्ता का निजी फंड नहीं है। यह खनन से प्रभावित जनता और क्षेत्रों के अधिकार का पैसा है। इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता को मिलना चाहिए।”

किसान मंच का कहना है कि उसकी मांग किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। बागेश्वर में जारी आंदोलन और नैनीताल में RTI के जरिए शुरू हुई दस्तावेजी पड़ताल के बाद अब DMF के उपयोग को लेकर उठ रहे सवाल प्रदेश के दूसरे जिलों में भी बहस का विषय बन सकते हैं।

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