आरटीआई में ‘वर्षों तक एक भी मरीज नहीं देखने’ का उल्लेख, तबादले के बाद भी नहीं छोड़ी कुर्सी; आखिरकार सीएमओ उत्तरकाशी ने किया डॉ. विनोद कुकरेती को एकतरफा कार्यमुक्त

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली, जवाबदेही और स्थानांतरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चिन्यालीसौड़ में वर्षों तक तैनात रहे प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनोद कुमार कुकरेती को अंततः मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) उत्तरकाशी ने 24 जुलाई 2026 को एकतरफा (एकपक्षीय) कार्यमुक्त कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई जब शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के बावजूद उन्होंने नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया।

प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार उत्तराखंड शासन ने 29 जून 2026 को वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया के तहत डॉ. कुकरेती का स्थानांतरण सीएचसी चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी से सीएचसी रायपुर, देहरादून कर दिया था। इसके बाद महानिदेशालय और सीएमओ कार्यालय की ओर से भी उन्हें समय पर नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश जारी किए गए। विभागीय पत्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि स्थानांतरित चिकित्सकों को निर्धारित अवधि के भीतर नई तैनाती स्थल पर योगदान देना था, लेकिन डॉ. कुकरेती द्वारा ऐसा नहीं किया गया।

इसी के बाद 24 जुलाई 2026 को सीएमओ उत्तरकाशी ने आदेश जारी कर उन्हें एकतरफा कार्यमुक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सेवा अभिलेख नई तैनाती स्थल भेजे जाएंगे तथा चिन्यालीसौड़ का प्रभार अन्य चिकित्साधिकारी को सौंपा जाएगा।

मामले को और गंभीर बनाता है एक आरटीआई के तहत उपलब्ध कराया गया आधिकारिक उत्तर। लोक सूचना अधिकारी, कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशी द्वारा जारी उत्तर में ओपीडी रजिस्टर के अभिलेखों के आधार पर यह उल्लेख किया गया है कि संबंधित अवधि में मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज द्वारा “एक भी मरीज नहीं देखा गया।” यदि विभागीय अभिलेखों में दर्ज यह स्थिति सही है, तो यह प्रश्न खड़ा होता है कि जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों तक एक प्रभारी चिकित्सा अधिकारी तैनात रहे, वहां मरीजों का उपचार किस व्यवस्था के तहत होता रहा।

स्थानीय स्तर पर भी लंबे समय से अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष की चर्चाएं रही हैं। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों के साथ मतभेद, अस्पताल प्रबंधन को लेकर शिकायतें तथा नर्सिंग स्टाफ के साथ विवाद जैसी बातें समय-समय पर सामने आती रही हैं। यह भी आरोप लगाए जाते रहे कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का प्रभावी संचालन भी सीएचसी चिन्यालीसौड़ में अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सका। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है, किंतु स्थानांतरण आदेश के बाद भी कार्यभार न छोड़ने की स्थिति ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि स्थानांतरण आदेश का पालन प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की वैधानिक जिम्मेदारी होती है। यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय में नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण नहीं करता, तो विभाग को प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एकतरफा कार्यमुक्त करने जैसी कार्रवाई करनी पड़ती है। इस मामले में भी सीएमओ उत्तरकाशी ने वही कदम उठाया।

अब इस प्रकरण ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरटीआई में उपलब्ध ओपीडी रजिस्टर के अनुसार संबंधित अवधि में मरीज नहीं देखे गए, तो इसकी विभागीय समीक्षा क्यों नहीं हुई? यदि स्थानांतरण आदेश का समय पर पालन नहीं हुआ, तो एकतरफा कार्यमुक्त करने की कार्रवाई तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? और सबसे महत्वपूर्ण, इस पूरी अवधि में स्थानीय जनता की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?

स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभागीय दस्तावेज, स्थानांतरण आदेश, एकतरफा कार्यमुक्ति पत्र और आरटीआई के माध्यम से सामने आए अभिलेख अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक समीक्षा की मांग को और मजबूत कर रहे हैं। यदि आवश्यक हुआ तो विभागीय स्तर पर इस मामले में आगे की कार्रवाई भी चर्चा का विषय बन सकती है।

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