नई दिल्ली।
भारत और भूटान के बीच पारंपरिक मित्रता को तकनीक और भविष्य की दिशा में एक नया आयाम देते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi और भूटान के प्रधानमंत्री Tshering Tobgay के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। यह बैठक अत्यंत सकारात्मक और परिणामोन्मुखी रही, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को वैश्विक कल्याण और सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप उपयोग करने पर व्यापक चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह बैठक “अत्यंत उत्कृष्ट” रही और दोनों देशों ने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शक्ति का उपयोग किस प्रकार वैश्विक भलाई के लिए किया जा सकता है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि तकनीकी प्रगति पर्यावरणीय संतुलन और स्थिरता के मूल्यों के साथ सामंजस्य में रहे।
उन्होंने भारत-भूटान की स्थायी मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संबंध आपसी विश्वास, सद्भावना और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव पर आधारित है। यही मजबूत आधार अब इस साझेदारी को नए और परिवर्तनकारी क्षेत्रों की ओर मार्गदर्शित कर रहा है।
वहीं भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग टोबगे ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “बड़े भाई” बताते हुए उनसे मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने भारत में आयोजित ‘ग्लोबल साउथ एआई समिट’ की सफल मेजबानी के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी। साथ ही उन्होंने भूटान के महाराज, सरकार और भूटान की जनता की ओर से भी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और तकनीकी सहयोग के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। भारत जहां वैश्विक स्तर पर उभरती डिजिटल और एआई शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, वहीं भूटान भी सतत विकास और तकनीकी नवाचार के संतुलित मॉडल को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-भूटान सहयोग यदि एआई, हरित ऊर्जा, शिक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में और गहराता है, तो यह न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
भारत-भूटान की यह नई तकनीकी साझेदारी भविष्य में वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।
