लालकुआँ, 17 फरवरी।
विधानसभा क्षेत्र में अवैध शराब और मादक पदार्थों के संगठित कारोबार को लेकर जनाक्रोश खुलकर सड़कों पर आ गया। क्षेत्रीय जन समस्या निवारण संघर्ष समिति के नेतृत्व में सैकड़ों लोग कोतवाली पहुँचे और पुलिस प्रशासन को सात दिन का स्पष्ट अल्टीमेटम सौंप दिया। चेतावनी साफ है—यदि ठोस, दिखाई देने वाली और सार्वजनिक कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो चरणबद्ध आंदोलन तेज किया जाएगा।
“छिटपुट नहीं, नेटवर्क पर वार”
समिति का आरोप है कि बिंदुखत्ता, हल्दुचौड़, मोटाहल्दू, बेरीपड़ाव, गौला गेट और देवरामपुर सहित कई इलाकों में अवैध शराब, स्मैक, चरस, गांजा और कच्ची शराब का कारोबार संगठित रूप से संचालित हो रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि युवाओं और छात्रों को लक्षित कर नशे का जाल फैलाया जा रहा है, जिससे अपराधों—चोरी, झपटमारी, घरेलू हिंसा—में बढ़ोतरी और परिवारों की आर्थिक-सामाजिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है।
समिति संयोजक पियूष जोशी ने कहा कि “केवल छोटे विक्रेताओं की गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। आपूर्ति श्रृंखला के मुख्य संचालकों, सप्लायरों और वित्तपोषकों पर कठोर कानूनी प्रहार जरूरी है।”
प्रशासनिक जवाबदेही और बीट व्यवस्था पर सवाल
ज्ञापन में बीट प्रणाली की पुनर्समीक्षा की मांग प्रमुख रही। आरोप है कि कुछ कार्मिक वर्षों से एक ही क्षेत्र में तैनात हैं, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं। समिति ने किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाए बिना लंबे समय से जमे कार्मिकों के स्थानांतरण और संवेदनशील इलाकों में नई टीम की तैनाती की मांग की है।
साथ ही, हर बीट की मासिक समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक करने और नशा-संबंधी शिकायतों की निगरानी के लिए विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त करने की बात भी रखी गई।
कानूनी कार्रवाई: सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, ‘चेन ब्रेक’ की रणनीति
समिति ने मांग रखी कि NDPS Act और Uttarakhand Excise Act के तहत बड़े नेटवर्क पर संयुक्त एवं निरंतर अभियान चलाया जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों की सूची बनाकर नियमित सघन गश्त
सादी वर्दी में निगरानी दल
गोपनीय सूचना देने वालों की पहचान की सुरक्षा
पूर्व शिकायतों पर की गई कार्रवाई की लिखित स्थिति सार्वजनिक करना
सात दिन में प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराना
शराब की दुकान पर पुनः विवाद
मोटाहल्दू क्षेत्र के व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप पांडे ने मोती नगर स्थित शराब की दुकान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि युवाओं के विरोध के बाद जिसे बंद कराया गया था, उसे दोबारा संचालित नहीं होने दिया जाए। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए स्थायी समाधान की मांग की गई।
आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि समयसीमा में ठोस कार्रवाई न होने पर—
कोतवाली परिसर के बाहर शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन धरना
जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव
क्रमिक अनशन, आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन
अवैध अड्डों के खिलाफ जन-जागरूकता और धरपकड़ अभियान
“टकराव नहीं, नशा-मुक्त लालकुआँ लक्ष्य”
छात्र महासंघ अध्यक्ष आशीष बड़वाल ने बीट कर्मियों के कार्यकाल की समीक्षा की मांग दोहराते हुए कहा कि निष्पक्ष कार्रवाई से ही भरोसा लौटेगा। प्रदर्शन में सचिन फुलारा, देवेंद्र तिवारी, हरेंद्र असगोला, कमल जोशी मुनि, हेमवती नंदन दुर्गापाल, योगेश कपिल, विशाल झा, अधिवक्ता भानु कबड़वाल, खजान चंद्र आर्य, प्रवीण शर्मा, भास्कर भट्ट सहित अनेक जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
समिति का कहना है कि उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि लालकुआँ को नशा-मुक्त बनाना है। अब निगाहें अगले सात दिनों पर हैं—क्या प्रशासन ‘नेटवर्क’ पर निर्णायक प्रहार करता है, या आंदोलन की आंच और तेज होगी?
