अल्मोड़ा/भिकियासैंण।

विधायक बिशन सिंह चुफ़ाल द्वारा अपनी विधानसभा में उप जिला अस्पताल स्वीकृत होने की जानकारी फेसबुक पर साझा किए जाने के बाद, इस दावे पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने विधायक की पोस्ट के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे जनता के इलाज से ज़्यादा ठेकेदारों के हित में उठाया गया कदम बताया है।

किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने अपने कटाक्ष भरे पोस्ट में लिखा कि उप जिला अस्पताल की स्वीकृति का असली मतलब साफ़ है—

ख़ज़ाना खुलेगा, नई बिल्डिंग बनेगी, मटीरियल आएगा और ठेकेदारों की बंदरबांट होगी,

लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि इलाज फिर भी आम जनता को नहीं मिलेगा।

 

डॉक्टरों के बिना अस्पताल?

 

किसान मंच का सवाल सीधा है जब मौजूदा स्वास्थ्य केंद्रों में ही डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी है, तो नया उप जिला अस्पताल किसके लिए बनाया जा रहा है?

 

कार्तिक उपाध्याय का आरोप है कि सरकार और जनप्रतिनिधि इस बुनियादी सवाल से जानबूझकर बच रहे हैं।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान मंच पहले ही जिला एवं जनपदीय स्वास्थ्य अधिकारियों के सामने IPHS (Indian Public Health Standards) से जुड़े प्रामाणिक दस्तावेज़ रख चुका है। इन मानकों के अनुसार, यदि CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को निर्धारित संसाधनों, मानव बल और सेवाओं से लैस कर दिया जाए, तो उप जिला अस्पताल की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

 

मानक अनदेखे, निर्माण प्राथमिक

 

उपाध्याय का आरोप है कि सरकार को न तो IPHS मानक दिखते हैं, न डॉक्टरों की कमी और न ही पहाड़ की जनता की वास्तविक स्वास्थ्य ज़रूरतें।

“दिखता है तो सिर्फ़ कंस्ट्रक्शन, टेंडर, भुगतान और कमीशन,”

यही कारण है कि हर समाधान इमारतों में खोजा जा रहा है, इलाज में नहीं।

 

 

सुयालबाड़ी–भिकियासैंण–चौखुटिया में स्वास्थ्य आंदोलन

 

बताया जाता है कि कार्तिक उपाध्याय लंबे समय से सुयालबाड़ी, भिकियासैंण और चौखुटिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आंदोलन में शामिल रहे। वे केवल विरोध नहीं, बल्कि सरकारी रिपोर्ट, cag रिपोर्ट और IPHS मानक दस्तावेज़ लेकर अधिकारियों के सामने तथ्य रखते रहे हैं। कई मौकों पर उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों के सामने प्रशासनिक अधिकारी मौन हो गए हैं।

राजनीतिक घोषणा बनाम ज़मीनी सच्चाई

किसान मंच का कहना है कि विधायक द्वारा सोशल मीडिया पर की गई घोषणा राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश की जा रही है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि पहाड़ में आज भी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों के अभाव में जूझ रहे हैं।

अपने बयान के अंत में कार्तिक उपाध्याय ने तीखा तंज कसते हुए कहा—

“लूटो, लूटो, खूब लूटो, क्योंकि सवाल पूछने वाला पहाड़ अभी सोया है।

अब जवाब किसका?

अब सवाल यह है कि क्या विधायक बिशन सिंह चुफ़ाल और स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों पर जवाब देंगे?

क्या उप जिला अस्पताल की घोषणा के साथ यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि डॉक्टर कब आएँगे, सेवाएँ कब शुरू होंगी और IPHS मानकों का पालन कब होगा?

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