हरिद्वार, 30 जनवरी।
हरिद्वार स्थित मातृ सदन ने शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सतत अनशन की घोषणा कर दी है। संस्था ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम को “पूर्व नियोजित साजिश” करार दिया है। मातृ सदन का कहना है कि न्याय नहीं मिलने तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।
मातृ सदन द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, 28 जनवरी 2026 की शाम लगभग 5:40 बजे ब्रह्मचारी सुधानंद ने थाना कनखल में अमित चौहान और उसके सहयोगियों पर जानलेवा हमले की लिखित शिकायत दी थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उस शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। संस्था का दावा है कि इसके विपरीत, कुछ ही घंटों बाद हमलावर पक्ष की ओर से दी गई शिकायत पर ब्रह्मचारी सुधानंद और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
मातृ सदन ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सत्ता संरक्षण में की जा रही कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया है कि कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक पदाधिकारियों की मिलीभगत से संतों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। संस्था का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं, बल्कि संत समाज की आवाज को दबाने का प्रयास है।
प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया है कि 31 जनवरी 2026 से संत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद सतत अनशन पर बैठेंगे। उनकी प्रमुख मांगों में ब्रह्मचारी सुधानंद की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना, दर्ज मुकदमों से निर्दोष लोगों के नाम हटाना और पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी को सौंपना शामिल है।
मातृ सदन ने अपने आंदोलन को पूरी तरह अहिंसक बताते हुए कहा है कि यह चेतावनी नहीं बल्कि अंतिम घोषणा है, और यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो इसके लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा। साथ ही, संस्था ने 31 जनवरी को दोपहर 12 बजे मातृ सदन परिसर में प्रेस वार्ता बुलाकर आगे की रणनीति साझा करने की बात कही है।
फिलहाल, इस मामले में प्रशासन या संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हरिद्वार की इस घटना ने प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक माहौल में हलचल तेज कर दी है, और अब सबकी निगाहें आगामी घटनाक्रम पर टिकी हैं।
