हल्द्वानी/कालाढूंगी।

 

अगले वर्ष राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो गई हैं। हल्द्वानी के वर्तमान मेयर गजराज सिंह बिष्ट ने कालाढूंगी से विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत देकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, गजराज सिंह बिष्ट का कहना है कि वे 2007 से लगातार दावेदारी करते आ रहे हैं, लेकिन हर बार पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल पाया।

 

 

गजराज सिंह बिष्ट ने स्पष्ट कहा कि वे इस बार पार्टी से टिकट की मांग करेंगे, और यदि भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया तो वे पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेंगे।

 

उन्होंने कहा कि कालाढूंगी सीट पर उनकी जीत की संभावना शत-प्रतिशत है, क्योंकि उन्होंने वर्षों से क्षेत्र में लगातार मेहनत की है और जनता से सीधा जुड़ाव रखा है।

उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता बंशीधर भगत का नाम लिए लेकर कहा कि वे एक वरिष्ठ नेता हैं, इसी वजह से पार्टी हमेशा उनका टिकट काटती रही। गौरतलब है कि पिछली बार भी गजराज सिंह बिष्ट ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी, लेकिन उस समय पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हस्तक्षेप और समझाने के बाद वे पीछे हट गए थे।

 

 

इस बार गजराज सिंह के तेवर बदले हुए नजर आ रहे हैं। देखना होगा अगर पार्टी टिकट नहीं देती है तो क्या वे निर्दलीय चुनाव लड़ने का विकल्प भी खुला रखेंगे, जो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

 

वहीं दूसरी ओर, बंशीधर भगत अपने बेटे विकास भगत को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि जनता द्वारा विकास भगत को सहज रूप से स्वीकार किया जाना आसान नहीं होगा।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गजराज सिंह बिष्ट निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो इससे भाजपा का समीकरण बिगड़ सकता है और मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। ऐसे में पार्टी के लिए सीट बचा पाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

 

कुल मिलाकर, कालाढूंगी विधानसभा सीट भाजपा के लिए अंदरूनी खींचतान और सियासी रणनीति का बड़ा इम्तिहा

न बनती जा रही है।

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