श्रीनगर (गढ़वाल)।


उत्तराखंड की आत्मा को झकझोर देने वाले बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्यभर में उबाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। न्याय की मांग अब एक स्वर में जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। इसी क्रम में किसान मंच ने केंद्र सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को उपजिलाधिकारी श्रीनगर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।
इस ज्ञापन का नेतृत्व किसान मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं उपाध्यक्ष भोपाल सिंह चौधरी ने किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण अब केवल एक हत्या का मामला नहीं रहा, बल्कि यह उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और लोकतंत्र पर जनता के विश्वास से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।


सीबीआई जांच ही जनता की आख़िरी उम्मीद”


ज्ञापन में कहा गया है कि अब तक की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से आमजन संतुष्ट नहीं है। यही कारण है कि प्रदेश के गांव-गांव, कस्बों और शहरों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। किसान मंच की टीमें जब किसानों, महिलाओं और युवाओं से संवाद कर रही हैं, तो हर जगह से एक ही मांग गूंज रही है — निष्पक्ष सीबीआई जांच।
भोपाल सिंह चौधरी ने कहा कि वीआईपी एंगल को लेकर उठ रहे सवाल जनता के आक्रोश को और तीव्र कर रहे हैं। जब तक इस एंगल की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक न्याय की अनुभूति संभव नहीं है।


युवा शक्ति का स्पष्ट संदेश


युवा समाजसेवी कल्पेश्वर चौधरी ने कहा—
“अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक बेटी की हत्या नहीं, बल्कि उत्तराखंड की हर बेटी की सुरक्षा का सवाल है। बिना निष्पक्ष जांच के न्याय असंभव है और युवा समाज अब चुप नहीं बैठेगा।”
वहीं किसान मंच के संरक्षक पीयूष जोशी ने दो टूक कहा—
“जब तक जांच पर जनता का भरोसा बहाल नहीं होगा, यह मामला शांत नहीं होगा। सच्चाई सामने लाने का एकमात्र रास्ता सीबीआई जांच है।”

“यह लड़ाई जनता की है”जन अधिकार मोर्चा के संस्थापक गणेश भट्ट ने कहा—
“यह संघर्ष किसी संगठन या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की जनता का है। यदि न्याय नहीं मिला, तो जन आंदोलन होना स्वाभाविक है।”

जनआंदोलन की चेतावनी


ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि गृह मंत्रालय स्तर से शीघ्र कोई निष्पक्ष और भरोसा बहाल करने वाला निर्णय नहीं लिया गया, तो हालात एक व्यापक जन आंदोलन की ओर बढ़ेंगे। किसान मंच ने दोहराया कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल से प्रेरित नहीं, बल्कि न्याय की मांग कर रही जनता की सामूहिक आवाज़ है।


ज्ञापन की प्रतिलिपि माननीय प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति को भी भेजी गई है।
इस अवसर पर किसान मंच प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय, कल्पेश्वर चौधरी, रुपेश नेगी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


स्पष्ट है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है — और यदि न्याय में देरी हुई, तो उत्तराखंड की धरती एक बड़े जनांदोलन की साक्षी

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